माता-पिता की आज्ञा मानना चाहिए । अनमोल कहानी

माता – पिता की आज्ञा मानो
हिरन का एक बच्चा अपनी मां के साथ रहता था । वह जहां भी जाता , उसकी मां साथ । होती । एक दिन उस बच्चे ने सोचा कि अब वह बड़ा हो गया है , अकेला कहीं भी जा सकता है । लेकिन उसकी मां उसे कहीं अकेला नहीं जाने देती थी । इससे परेशान हिरन के बच्चे ने चुपचाप , किसी को बताए बिना खिसक जाने की योजना बनाई ।

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भरी गर्मी की दोपहरी में एक दिन जब हिरनी सो रही थी तो वह बच्चा चुपचाप वहां से | खिसक लिया । वह एक खुले मैदान में जा पहुंचा और इधर – उधर खूब कुलाचें भरने लगा , उसे । बहुत मजा आ रहा था । लेकिन कुछ ही देर बाद उसे प्यास सताने लगी । वह निकट ही एक झरने पर जाकर पानी पीने लगा । पानी पीकर अभी हटा ही था कि देखा , थोड़ा ऊपर झरने के किनारे खड़ा शेर उसी को घूर रहा था । वह अपने मुंह पर जीभ फिरा । रहा था अर्थात उसका शिकार करना चाहता था ।

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उसकी लाल – लाल आंखें देख हिरन के बच्चे की घिग्गी बंध गई थी . उसकी कळस नहीं आ रहा था कि ऐसे में क्या करे । वह पछता रहा था कि क्यों उसने अपनी मां का कहना नहीं माना । शेर ने उसे अपने पास बुलाकर कहा , ” तुम मेरे पीने का पानी जूठा क्यों कर रहे हो ? ” हिरन का बच्चा बोला , ” मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं , ऊपर तो आप खड़े हैं । पानी पहले । आपके पास आ रहा है , फिर मेरे पास । ” कहते हुए वह धीरे – धीरे पीछे की ओर चलने लगा । अब शेर को समझ में ही न आया कि क्या बहाना बनाए । उधर हिरन का बच्चा भी अपने बचाव का रास्ता ढूंढ़ने लगा था । तभा शेर के कानों में हिरनी की आवाज पडी , जो अपने बच्चे को पुकार रही थी । बच्चा तुरंत अपनी मां की ओर भाग छूटा ।
शेर निराश हो गया ।

और हिरन के बच्चे को पता चल गया कि माता – पिता की आज्ञा न मानने का परिणाम कितना भयंकर हो सकता है ।

 दादी मां की कहानिया  

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