चमत्कारी अंगूठी , रोमांचक कहानियां , ज्ञान की कहानियां

                              चमत्कारी अंगूठी  

यमुना नदी के किनारे रतनपुर गाँव में प्रकाश नाम का एक गरीब आदिवासी लड़का रहता था । जब वह छोटा था , तभी उसके माता – पिता गुजर गये थे । प्रकाश बहुत होशियार , दयालु और मेहनती था । पिता की सम्पत्ति के रूप में उसे एक नाव , एक जाल और रहने को एक झोंपड़ी ही मिली थी । वह यमुना नदी में जाल डालता , मछली पकड़ता और उन्हें शहर में बेचकर अपना खर्च चलाता । अपने काम से समय निकालकर वह थोड़ा पढ़ लिख भी लेता था । 

एक दिन की बात है । रोज की तरह एक शाम जब प्रकाश ने नदी में फैलाया अपना जाल समेटा , तो उसमें मछली तो एक भी नहीं थी , बल्कि एक बड़ा – सा कछुआ फंसा हुआ था । कछुए को जाल में फँसा देख उसे बड़ा आश्चर्य हुआ । इतना बड़ा कछुआ तो उसने पहले कभी नहीं देखा था । 

कछुए को किनारे की तरफ करके वह घर जाने की तैयारी करने लगा । तभी प्रकाश ने देखा कि कछुआ एक ऋषि के रूप में परिवर्तित हो चुका है । यह देख प्रकाश

एकदम डर गया । लेकिन ऋषि ने जो कहा , उससे प्रकाश का डर जाता रहा । ऋषि ने मुस्कुराते हुए कहा – प्रकाश मैं तुम्हारा बहुत आभार मानता हूँ । तुम्हारी वजह से ही आज मैं ऐसे श्राप से मुक्त होकर अपने वास्तविक रूप में आ सका हूँ , तुम्हारे इस उपकार के बदले मैं तुम्हें कुछ दूंगा । यह कहकर ऋषि ने प्रकाश के हाथ पर एक अंगूठी रख दी और कहा – इस अंगूठी में विशेष गुण है । इसे पहनकर तुम जो काम करोगे , उसी में सफलता मिलेगी । इतना कह ऋषि घने जंगलों की ओर बढ़ गए । 

चमत्कारी अंगूठी  , रोमांचक कहानियां , ज्ञान की कहानियां fingers ring , story khajana.blogspot.com


प्रकाश ने उस अंगूठी को सँभालकर रख लिया । सोचा – जरूरत पड़ने पर मैं इस अंगूठी को पहनूँगा । उस वर्ष वर्षा के मौसम में नदी में खूब बाढ़ आई । नदी के किनारे बसे घर और खेत बाढ़ के पानी में डूब गए । इस तबाही से फसल बरबाद हो गई । लोग भूखों मरने लगे । प्रकाश का घर भी पानी में डूब गया । 

प्रकाश ने वह अँगूठी पहनी और अपनी नाव से डूबते लोगों को बचाने लगा । अँगूठी का प्रभाव हुआ । प्रकाश को अपने काम में भरपूर सफलता मिली । उसकी नाव के सहारे गाँव के आधे से ज्यादा लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुँच गए । सब लोगों ने प्रकाश का बहुत अहसान माना । अंगूठी के प्रभाव से प्रकाश ने सभी के लिये खाने – पीने का प्रबंध किया । फिर उसने जंगल में लकड़ी काट- काटकर गाँव के लोगों के लिए सुंदर – सुंदर घरों का निर्माण किया । सभी लोगों के रहने की व्यवस्था हुई । प्रकाश इस नेक काम से गाँव के लोगों के लिए वह आँखों  का तारा बन गया । उसकी लोकप्रियता बढ़ती गई । आसपास के गाँवों में भी इसकी इज्जत होने लगी । 

प्रकाश की लोकप्रियता की खबर धीरे – धीरे इलाके के राजा तक भी पहुँची । उसने प्रकाश को अपने पास बुलाया । पूछा – तुमने अकेले ही सारे गाँव को तबाही से बचाया । उनके लिए घर बनाकर उन्हें फिर से बसाया । इतना सब कुछ तुमने अकेले कैसे किया ? 

प्रकाश ने राजा को अंगूठी की प्राप्ति की पूरी घटना सुना दी और कहा – इसी अंगूठी के प्रभाव से मैं यह सब काम सफलतापूर्वक कर पाया हूँ । अंगूठी के बारे में यह सब सुन राजा सोचने लगा – क्यों न यह अंगूठी मैं प्राप्त कर लूँ और इसे पहनकर पड़ोसी राजा से युद्ध करूँ , जिससे मुझे विजय मिलेगी और शत्रु सेना की हार होगी । 

वह प्रकाश से बोला – तुम यह अँगूठी मुझे दे दो । बदले में तुम्हें जो चाहिए , माँग लो । । 


आप तो राजा हैं । सबका भला ही करते हैं । आप इस अंगूठी को ले लीजिए । यह आपके काम आएगी । इसके बदले में मुझे कुछ नहीं चाहिए । प्रकाश ने कहा । राजा ने अंगूठी ले ली । कुछ दिनों बाद राजा ने अपने पड़ोसी राज्य पर हमला बोल दिया । भीषण युद्ध हुआ । दोनों तरफ से भयंकर मारकाट हुई । युद्ध में राजा बुरी तरह घायल हो गया । वह बुरी तरह से हार भी गया था । उसे प्रकाश पर बहुत गुस्सा आया । उसने सोचा – प्रकाश ने मुझे बेवकूफ बनाया है ।

 यह सोचकर उसने प्रकाश को कैद खाने में डलवा दिया । रात को राजा सो रहा था । उसे एक सपना आया । सपने में एक ऋषि राजा से कह रहे थे – राजन् तुमने बेकसूर प्रकाश को कैद खाने में डालकर ठीक नहीं किया है । उसे तत्काल छोड़ दो । यह अंगूठी बहुत चमत्कारी है । लेकिन इसका चमत्कार लोगों की भलाई करने में ही फलता है । प्रकाश ने इस अगूठी का उपयोग लोगों की भलाई करने में किया था । इस कारण उसे अपने काम में सफलता मिली । किन्तु तुमने इसका प्रयोग स्वयं के भले के लिए तथा युद्ध जैसे विनाशकारी कार्य में किया । उसी से अँगूठी का प्रभाव नहीं हुआ ।

 ‘ सपना देख राजा हड़बड़ा  कर जाग उठा । उसने सपने की बात पर विचार किया । उसे अपनी भूल मालूम हुई । उसने उसी समय प्रकाश को कैद खाने से इज्जत के साथ अपने पास बुलाया । उसे अँगूठी वापस लौटा दी । दूसरे दिन सुबह राजा ने खूब धन देकर उसे विदा किया । अंगूठी लेकर प्रकाश फिर से लोगों की भलाई के कार्यों में जुट गया ।

You May Also Like

About the Author: admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *