अनुमान लगाना यानी बिना जानकारी के किसी बात का अंदाज़ा लगाना , अँधेरे में तीर चलाना । अनमोल ज्ञान की बातें ।

अनुमान लगाना यानी बिना जानकारी के किसी बात का अंदाज़ा लगाना , अँधेरे में तीर चलाना । लोग अनुमान लगाते – लगाते इसके आदी हो जाते हैं । फिर यह आदत उनके दु : ख में बढ़ोतरी ही करती है तथा दु : ख का एक और कारण बनने लगती है । पहले ही इंसान दु : खी है ऊपर से उसकी अनुमान लगाने की आदत है तो उसका दु : ख दुगुना हो जाता है । किसी भी घटना में अनुमान न लगाते हुए उसे नये दृष्टिकोण से देखें । कई बार आप किसी को देखकर अनुमान लगाते हैं कि ‘ यह इंसान फ़िल्मी खलनायक की तरह ख़तरनाक लग रहा है , ज़रूर बुरा ही होगा । ‘ जबकि ऐसा नहीं है । लेखक की यह मज़बूरी होती है कि वह फ़िल्मों में किरदार के हिसाब से ही लोगों के चेहरे बनाता है मगर हम लोगों के चेहरे देखकर कोई भी अनुमान न लगायें । अच्छे लोग आपको हर रूप में मिल जायेंगे ।

अनुमान लगाना यानी बिना जानकारी के किसी बात का अंदाज़ा लगाना , अँधेरे में तीर चलाना । anmol gyan . story khajana.blogspot.com

इंसान के अधिकांश अनुमान ग़लत निकलते हैं । फिर भी वह अनुमान लगाना नहीं छोड़ता । सामने वाले के हर वाक्य पर वह अनुमान लगाता है कि ‘ उसने यह – यह सोचकर ऐसा कहा होगा । वह मुझे नीचा दिखाना चाहता है इसलिए ऐसा कहा होगा या वह अपना फ़ायदा करने के लिए ऐसा कर रहा होगा । ‘ जब सामने वाले से पूर्णता की जाती है , तब इंसान को पता चलता है । कि ऐसा बिलकुल नहीं था , कारण कुछ और था , जिसकी जानकारी उसे नहीं थी और वह बेवजह राई का पर्वत बना रहा था । याद रखें , पूरी जानकारी के साथ लगाये गये अनुमान , अनुमान नहीं , अनुभव हैं । आधी जानकारी के साथ लगाये गये अनुमान मन के खेल हैं । जिस दिन आप अपने मन में यह भावना रखेंगे कि आज किसी भी बात पर अनुमान नहीं लगायेंगे , उस दिन आप बहुत कुछ सीखने वाले हैं । जिस तरह फ़िल्म ख़त्म होने से पहले आप कोई भी अनुमान नहीं लगायेंगे तो आप फ़िल्म का पूरा आनंद पायेंगे वरना बोर होकर सिनेमा हॉल से बाहर आ जायेंगे । उसी तरह जीवन की फ़िल्म में भी अनुमान लगाकर इसका मजा किरकिरा न करें । बिना अनुमान लगाये अपना नाटक , बिना अटके देखें । पर्दे पर दूसरों के नाटक आप बिना अटके देख पाते हैं लेकिन अपने आस – पास और अपना नाटक बिना अनुमान लगाये आप नहीं देख पाते । इसलिए इस भावना पर जल्द से जल्द काम करके अनुमान की पूँछ काट डालें । छल , कपट करना मन की आदत है , जो डर और लालच की वजह से पैदा होती है । असुविधा और असुरक्षा के डर से इंसान कुछ बातें छिपाकर रखता है । पूछने पर झूठ बोलता है , बताने पर घुमा – फिराकर बताता है । दूसरों के गुण घटाकर बताता है , अपने गुण बढाकर बताता है । इस तरह इंसान कपट का मोहताज हो जाता है ।

कई बार लाभ के लोभ में इंसान सामने वाले को ग़लत जानकारी देता है । लोभ में उलझकर वह सदा कपट करके धन कमाना चाहता है । कपट की । यह आदत बढ़कर महारोग बन जाती है । वह फिर अपने आपसे भी कपट । करने लगता है । वह अपनी बातें ख़ुद से छिपाने लगता है । उसके बाद उसका विकास थम जाता है । भावना की शक्ति जगाने वाले अपना विकास नहीं । रोकते । इसलिए अब आप कपट को दूर करने का पहला क़दम उठायें । । आज के दिन अपने आपसे ईमानदारी से बातें करें । स्वयं को अपना सच बतायें कि मैं कब सामने वाले के काम में टाँग अड़ाता हूँ , मैं कब सामने । वाले का कार्य ख़ुशी से करता हूँ , किस काम के पीछे मुझमें डर समाया रहता है , किस काम के पीछे मुझमें लालच पैदा होता है , कौन सा काम मैं अहंकार की पुष्टि के लिए करता हूँ और कौन सी बातों से मैं आहत ( घायल , जख्मी ) होता हूँ और बुरा महसूस करता हूँ । ‘ आज कोई छोटा सा भी झूठ , जिसे बोलने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता है , आपको नहीं बोलना है । जैसे किसी को आपने कह दिया कि यह काम मैंने पूरा कर लिया । ‘ हालाँकि आप जानते हैं कि अभी आपने उस काम को नहीं किया है , थोड़ी देर के बाद करने वाले हैं मगर आप सोचते हैं कि ऐसा बोलने में क्या हर्ज़ है ? हालाँकि सामने वाले इंसान को तो जन्म भर पता नहीं चलेगा । कि आपने वह काम तब किया या बाद में किया । मगर इस छोटे से झूठ को भी आज के दिन नहीं बोलना है ताकि आपको झूठ न बोलने की , कपट न । करने की आदत पड़े । आपको न तो डॉक्टर से और न ही अपने आप से कपट करना है । यदि । आपकी पीठ में दर्द हो रहा है और डॉक्टर को आप बतायेंगे कि ‘ मेरे पेट में दर्द हो रहा है ‘ तो किसका नुक़सान होगा ! नुक़सान आपका ही होगा । डॉक्टर आपके बताये हुए मर्ज की दवा देगा । इस उदाहरण से समझें कि सत्य बताकर ही आप हर बाधा हटाकर सच्ची सफलता पा सकते हैं । आप अपने

आपको सच बतायें कि ‘ मेरे अंदर ये – ये अवगुण हैं , जिन्हें दूर करने की जरूरत है । ‘ अपने आपको अपना सत्य आज ज़रूर बताये ।

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